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प्राचार्य संदेश

सम्मानित अभिभावकगण!

सादर नमस्ते।

‘‘तेजोऽसि तेजो मयि धेहि। (हे परमेश्वर! आप तेज स्वरूप हैं मुझे तेज दें जिससे मैं ज्ञान रूपी प्रकाश के माध्यम के सहारे पूरे संसार को आलोकित कर सकूं।) - यजुर्वेद

महान शिक्षाविद् एवं आधुनिक भारत के चिंतक महर्षि दयानंद सरस्वती जी के अनुसार शिक्षण शैली का रचनात्मक विकास तभी संभव है जब शिक्षा को सुव्यवस्थित, अनुशासित एवं संस्कारयुक्त परिवेश में प्रदान किया जाए। उनके अनुसार बालकों को ऐसी शिक्षा दी जानी चाहिए जिससे उनका चरित्र बने, बुद्धि का विकास हो, मानसिक शक्ति प्रखर हो, वे सदाचारी, परोपकारी बनें तथा आत्मनिर्भर होकर अपने जीवन पथ पर दृढ़ता से आगे बढ़ सकें। इन्हीं आदर्शों को आत्मसात करते हुए हलवासिया विद्या विहार विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं संस्कारपूर्ण पीढ़ियों के निर्माण को अपनी शैक्षिक विरासत मानता है। इस गौरवशाली परंपरा की निरंतर समृद्धि हेतु आपका स्नेह-सहयोग सदैव अपेक्षित है।

विद्यालय परिवार पूर्ण निष्ठा के साथ छात्रों को ऐसा प्रेरणादायी एवं नैतिक वातावरण प्रदान करने के लिए संकल्पित है जहाँ वे न केवल ज्ञानार्जन करें, बल्कि जीवन मूल्यों को आत्मसात करते हुए उत्तम नागरिक के रूप में विकसित हों। हम विद्यार्थियों को यह अनुभूति कराते हैं कि प्रतिभाएँ आत्म-लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की भलाई के लिए विकसित की जाती हैं। वर्तमान युग इंटरनेट , आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस एवं आधुनिक कंप्यूटर शिक्षा का युग है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए विद्यालय के माध्यमिक विभाग में सौर ऊर्जा से संचालित 50 कंप्यूटरों से युक्त अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब की स्थापना की गई है। साथ ही विद्यालय के पुरातन छात्र, प्रख्यात शिक्षाविद् एवं मार्गदर्शक डॉ. विकास दिव्यकीर्ति द्वारा नई शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप कक्षाओं को डिजिटल पैनल से सुसज्जित करने हेतु प्रदान किया गया सहयोग आधुनिक शिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करता है।

विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों एवं नेतृत्व क्षमता के विकास हेतु विद्यालय में विभिन्न विषयों से संबंधित परिषदों का गठन किया गया है, जिनके माध्यम से छात्र रंगमंच, संगीत, नृत्य, वाद-विवाद, भाषण एवं ललित कला जैसी गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता करते हैं।

विद्यालय द्वारा संचालित ‘फिट हलवासिया-फिट इंडिया’ एवं ‘खेलो हलवासिया-खेलो इंडिया’ अभियानों के माध्यम से विद्यार्थियों में स्वस्थ जीवनशैली एवं खेल भावना का विकास किया जाता है। हमारे खिलाड़ी विभिन्न स्तरों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय की विशिष्ट पहचान को सशक्त बनाते हैं।

इसके अतिरिक्त विद्यार्थी सामाजिक एवं पर्यावरणीय गतिविधियों में सहभागिता कर संवेदनशील एवं उत्तरदायी नागरिक के रूप में विकसित होते हैं। वास्तव में शिक्षा का मूल उद्देश्य संस्कार है। इन्हीं मूल्यों के संवर्धन हेतु हलवासिया विद्या विहार प्राचीन वैदिक संस्कृति के बोध के साथ नई शिक्षा नीति के अनुरूप आधुनिक शैक्षणिक तकनीकों को अपनाता है।इसी शैक्षिक दृष्टि के अंतर्गत नई शिक्षा नीति के अनुरूप कक्षा ग्यारहवीं में बैंकिंग, योग एवं पेंटिंग जैसे कौशल-विकास आधारित विषय तथा कक्षा छठी से आठवीं तक कोडिंग, हैंडीक्राफ्ट एवं हर्बल हेरिटेज जैसी गतिविधि-आधारित कक्षाएँ संचालित की जा रही हैं। विद्यालय में प्रवेश लेने वाले सभी नवागंतुक विद्यार्थियों का हार्दिक स्वागत है। हमें विश्वास है कि हमारे विद्यार्थी संस्कार, अनुशासन एवं आत्मविश्वास के साथ अपने जीवन लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे।

हमारे विद्यार्थी ही हमारी अमूल्य धरोहर हैं-उनके उज्ज्वल भविष्य हेतु विद्यालय परिवार की ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ।

हम आशान्वित हैं कि अभिभावकों के विश्वास और विद्यालय के सतत प्रयासों के समन्वय से यह संस्थान शिक्षा, संस्कार और सेवा के क्षेत्र में निरंतर नवीन कीर्तिमान स्थापित करता रहेगा।

आपके सहयोग और हमारे समर्पण से यह विद्यालय नए कीर्तिमान स्थापित करे। ऐसी शुभेच्छाओं के साथ.........

 विमलेश आर्य 

  प्राचार्य

  
               

“दुनिया को अपना सर्वश्रेष्ठ दीजिए आपके पास स्वयं सर्वश्रेष्ठ लौट कर आएगा |”

महर्षि दयानंद सरस्वती

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